ढोल, दमों | ” ढ़ोल दमों देवभूमि की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक थाती”

विनय सेमवाल श्री गोपीनाथ मंदिर (Gopinath Temple, Gopeshwar) प्रांगण में प्रति दिन भाई चंद्रू और हेमंत को ढोल, दमों की ताल पर नौबत बजाते हुए देखते ही द्वारिका प्रसाद महेश्वरी जी की कविता की ये पंक्तियां:- “यदि होता किन्नर नरेश मैं ,,,,,,,,,,,,,। प्रतिदिन नौबत बजती रहती संध्या और सबेरे” याद आ जाती हैं। पहले अपने … Continue reading ढोल, दमों | ” ढ़ोल दमों देवभूमि की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक थाती”