गोपेश्वर।
वीआईपी दर्शन से इस साल बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर में नब्बे लाख से अधिक की आय हुई है। पहली बार देश के अन्य मंदिरों की तर्ज पर बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी सशुल्क वीआईपी दर्शन की व्यवस्था की गई है और अकेले बद्रीनाथ में ही बाइस हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और 300 रुपए की रसीद कटा कर वीआईपी दर्शन के जरिए मंदिर की आय बढ़ायी हैं।
श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार दोनों मंदिरों में अभी तक 30,546 वीआईपी और वीवीआईपी तीर्थ यात्री दर्शन कर चुके हैं। इससे श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को रूपये 91,63,800 की आय प्राप्त हुई है।
बीकेटीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस वर्ष 25 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पश्चात अब तक 8,198 विशिष्ट व अतिविशिष्ट तीर्थ यात्रियों ने दर्शनों का लाभ उठाया है। इससे बीकेटीसी को रूपये 24,59,400 का लाभ हुआ। जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के पश्चात वहां अभी तक 22,348 हजार विशिष्ट व अतिविशिष्ट महानुभाव दर्शनों के लिए पहुंचे। इनसे बीकेटीसी को रूपये 67,04,400 प्राप्त हुए।
उल्लेखनीय है कि यात्राकाल में दोनों धामों में वीआईपी व वीवीआईपी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। बीकेटीसी वीआईपी श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्शन कराती थी और निःशुल्क प्रसाद भी देती थी। वीआईपी व वीवीआईपी श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था। वीआईपी व वीवीआईपी श्रद्धालुओं के नाम पर अनेक अव्यवस्थाएं भी पैदा होती थीं।
इस साल यात्राकाल से पूर्व बीकेटीसी ने देश के चार बड़े मंदिरों श्री वैष्णोदेवी, श्री तिरूपति बाला जी, श्री सोमनाथ व श्री महाकाल मंदिर की वीआईपी दर्शन से जुड़ी व्यवस्था का अनुसरण करते हुए मंदिरों में आने वाले विशिष्ट व अति विशिष्ट महानुभावों से दर्शनों के लिए शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव पर अमल करते हुए वीआईपी दर्शन चाहने वाले व्यक्तियों के लिए 300 रूपये शुल्क निर्धारित किया था। जिसके लाभ दिखने लगे हैं। नयी व्यवस्था से वीआईपी व वीवीआईपी के नाम पर दर्शनों के लिए घुसने वालों पर भी रोक लगी है।
बीकेटीसी ने इस नई व्यवस्था की शुरुवात इस वर्ष केदारनाथ धाम से शुरू की थी। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर बीकेटीसी ने पहली पर्ची मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की काटी थी। मुख्यमंत्री ने 300 रूपये का शुल्क चुका कर दर्शन किये थे।
Badrinath and Kedarnath temple earn more than ninety lakhs this year from VIP darshan

