Tuesday, January 13, 2026
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Shraddha and Tarpan at Bahmakpal in Badrinath. बदरीनाथ में बह्मकपाल में श्राद्घ एवं तर्पण‌

Shraddha and Tarpan at Bahmakpal in Badrinath

बदरीनाथ।
श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही बदरीनाथ में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने लगी है। शुक्रवार को पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध के अवसर पर बड़ी संख्या में बदरीनाथ में बह्मकपाल में श्राद्घ एवं तर्पण‌ करने पहुंचे।
श्राद्ध पक्ष शुरू होने के साथ बदरीनाथ धाम में यात्रा ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। बरसात के बाद तीर्थयात्रियों के पहुंचने का क्रम जारी है। अभी तक तेरह लाख अस्सी हज़ार से अधिक तीर्थयात्रियों ने श्री बदरीनाथ धाम के दर्शन कर लिए है।

श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि आज शुक्रवार से श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही पहले दिन दोपहर तक सात हजार तीर्थ यात्री श्री बदरीनाथ धाम पहुंच गये थे।
श्री बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल तीर्थ में पित्रों के श्राद्ध के लिए तीर्थयात्रियों के आने का क्रम जारी रहा।

पहले दिन पूर्णिमा- प्रतिपदा श्राद्ध पर तीर्थयात्रियों ने अलकनंदा नदी में स्नान किया तथा ब्रह्म कपाल पर पिंडदान तथा तर्पण कर पितरों का आशीर्वाद लिया ओर पितृ मोक्ष की कामना की। यह क्रम पितृ विसर्जन अमावस्या 14 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्म कपाल के विषय में मान्यता है भगवान नारायण की महिमा से यहां पर भगवान शिव को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिल गयी थी। तथा ब्रह्मा जी का कटा हुआ शीश भगवान शिव के हाथ पर चिपक गया था वह छिटक कर अलकनंदा के तट बदरीनाथ मंदिर के बायें तरफ गिर पड़ा था इस स्थान का नाम ब्रह्म कपाल अर्थात ब्रह्मा जी का सिर हो गया।

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