जोशीमठ।
जोशीमठ आपदा से सबसे अधिक प्रभावित सिंहधार और मनोहरबाग वार्ड के इलाके है। अन्य जगहों की तरह सिंहधार में स्थित प्राथमिक पाठशाला भी एक महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद पहली फरवरी से खुल गई है। यह स्कूल इन क्षतिग्रस्त घरों से मुस्किल से सौ से दो सौ मीटर की दूरी पर है। आपदा से पहले यहां चालीस छात्र पढ़ा करते थे। लेकिन पहली फरवरी को इस स्कूल में केवल दस छात्र ही पहुंच पाये। शुक्रवार को जब यह संवाददाता इस विद्यालय में पहुंचा तो स्कूल में पठन पाठन जारी था लेकिन पंजीकृत छात्रों के मुकाबले छात्र-छात्राओं की संख्या आधी ही थी।
विद्यालय की प्रधानाचार्य ने स्वीकार किया कि जोशीमठ की इस आपदा ने बच्चों की विद्यालय की उपस्थिति में कम की है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से अनुपस्थिति बच्चों के अभिवावकों से संपर्क कर रही है। अनुपस्थित बच्चों में से कुछ की जानकारी तो मिल रही है लेकिन दस से बारह ऐसे अभिवावक है जिनस ेसंपर्क नहीं हो पा रहा है। संभवयता इनके अभिवावक आपदा के बाद जोशीमठ से बाहर चले गए है।
इस विद्यालय के समीप रहने वाली विश्वेश्वरी देवी रहती है जिनकी एक पोती और एक पोता आपदा से पहले नियमित स्कूल जाते थे लेकिन अभी तीन दिन हो गए हैं लेकिन स्कूल नहीं जा रहे है। इस पर विश्वेश्वरी देवी कहती है अभी सब कुछ अस्त-व्यस्त है व्यवस्थित होने के बाद इन्हें भी स्कूल भेजेंगे।
छात्रों की कम उपस्थिति जोशीमठ में लगभग हर स्कूल में है। रेखा शाह बताती है कि उपस्थिति का कम रहने के पीछे यहां अस्थायी रूप से रहने वाले परिवारों का दूसरे स्थानों में पलायन एक बड़ा कारण है। अपने विद्यालय का उदाहरण देते हुए वह कहती हैं। पुछताछ में तीन अभिवावकों ने बताया कि वे जोशीमठ छोड़ चुके हैं। जिनमें से कुछ ने घिंघराण में अपने बच्चों का पंजीकरण करा दिया है।

