जोशीमठ।
जोशीमठ नगरपालिका परिषद के सुनील वार्ड के अंतर्गत आने वाली तीस-चालीस परिवारों की दाड़िल बस्ती में पिछले डेढ साल से लोग परेसान है। अधिकतर घरों में दरारे है। हर रात दुर्घटना की आशंका में यहां के लोग ठीक से सो भी नहीं पा रहे है। इस बस्ती जयेश्वरी और दिनेश लाल सबसे पहले विपदा के शिकार बने। जयेश्वरी देवी बताती है ‘2021 के अगस्त सितम्बर के महीने से सबसे पहले हमारे आंगन की जमीन धंसी। नवम्बर में धसने का यह सिलसिला हमारे घर पर हल्की दरारों के रूप में दिखने लगा था और दिसम्बर आते-आते घर चकनाचूर हो गया। जयेश्वरी अपने परिवार के साथ इस घर में थी। दिसम्बर 2021को अंततः इस घर को छोड़ कर भागना पड़ा।’ इनका परिवार पिछले 13 महीने से पड़ोसी के घर में रह रहा है।
चालीस साल की जयेश्वरी का घर उन कुछ घरों में शामिल है जिनका भूधसाव से ध्वस्त होने का सिलसिला पिछले तेरह-चौदह महीन पहले शुरू हो गया है। जयेश्वरी के पति दिनेश लाल मजदूर करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं,कहते हैं ‘मकान के क्षतिग्रस्त होने सूचना कई बार स्थानीय प्रशासन को दी। कभी इस पर एक्शन नहीं लिया गया। जब भी तहसील में जाते थे वहां से यह कह कर वापस लौटा दिया जाता था कि ऐसा सभी जगह हो रहा है।’ जयेश्वरी कहती है कि ‘गरीब की सुनवायी नहीं हुई। अब जब बड़े-बड़े होटलों और बड़े घरों की ध्वस्त होने की शुरूआत हुई तो तब सरकार चेती है।’ दिनेश लाल कहते है कि जोशीमठ में आपदा से बचाव के लिए अधिकारियों का जमावाड़ा लगा है लेकिन हमारा घर सड़क से आधा किलोमीटर की पैदल दूरी पर होने से हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पैदल होने के कारण न कोई अधिकारी हमारी सुध लेने आये और नहीं कोई मदद हमें मिली है। जयेश्वरी को अभी चार हजार की मदद भी नहीं मिली।
सुनील वार्ड में, जोशीमठ-औली मोटर मार्ग पर सुनील गांव में भी जगह-जगह भूघसाव और दरारे पड़ी हुई है। सुनील गांव के उपरी हिस्से में रहने वाले सकलानी परिवारों के घरों के घंसने का सिलसिला भी दाड़िल गांव की तरह ही लगभग चौदह महीने पहले शुरू हो गया था। सकलानी परिवारों के तीन घर असुरक्षित हो चुके है ये आसपास ही हैं। इनमें से नेहा सकलानी का घर, जयेश्वरी के घर की तरह ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। छत की लेंटर कांच के टुकड़ों की तरह टूट पड़ी है। नेहा की मां दो दिन पहले ही देहरादून से अपने पेट की रसौली का ईलाज करके घर लौटी है और दोपहर में जब यह संवाददाता उनके मिलने पहुचा, तो इसी टूटे घर के अंदर लेटी हुई थी। नेहा की मां की उम्र चालीस साल होगी। जब उनसे इस जोखिम भरे घर में रहने का कारण पुछा तो उनका कहना था कि यह टूटा हुआ घर केवल घर ही नहीं है इसके साथ हमारी संवेदना भी जुड़ी हे और हमारी आजीविका भी। हमारे साथ हमारे पालतु पशु भी है जिन्हें हम यहा अकेले नहीं छोड़ सकते। इसी से हम लोग घर का खर्चा चलाते है। छह बहिनों में तीसरे नंबर की नेहा बताती है कि ‘मकान में दरार और धंसाव का सिलसिला चौदह महीने पहले शुरू हो गया था। पिताजी बार बार तहसील में जाते थे राहत और बचाव की प्रार्थना करते थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।’ नेहा ने बताया कि 2 जनवरी को मकान पूरी तरह टूटा और उस वक्त घर में हम दोनो बहिने अकेली थी। प्रशासन की ओर से हमारे घरों में लाल निसान लगा कर इसे डेंजर जोन घोषित कर रखा है और निर्देश दे रखे है कि पास में ही एक लांज है उसमें रहे। नेहा के पड़ोस में तीन और घरों भी भूधासव की जद में हैं। इन तीनों घरों को डेंजर जोन में रखा गया है। लेकिन इन तीनों घरों में लोग उसी तरह रह रहे हैं। कुछ लोग रात को यहां से पास के लांज में चले जाते हैं लेकिन कुछ अभी भी इन्हीं घरों में हैं। नेहा के चाचा विनोद प्रसाद सकलानी का मकान जोशीमठ औली हाई-वे पर है। दो साल पहले उन्होंने अपने परिचितों और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर अपने पूराने घर के साथ पर्यटकों के आवास को ध्यान में रखते हुए नया घर बनाना शुरू किया था। लाखों रुपये लगाने के बाद अचान अब घर के निचले हिस्सा भूधसाव की चपेट में आ गया है। विनोद प्रसाद का पर्यटक आवास का सपना भी चनाचूर हो गया है। विनोद सकलानी की पत्नी बताती है कि कुछ सेब के बगीचे और गाय-भैंस का दूध बेचकर बच्चे पढ़ा रहे थे। लेकिन अब सब सपने चकनाचूर हो गए।
जोशीमठ शहर में जहां यहां के पैतृक निवासियों के घर मकान ध्वस्त हो रहे हैं वही कई लोग आसपास के गांवों से अपना गांव छोड़कर शहर में बसने की हसरत से यहां आए थे। जिनमें कई लोग सेना और अर्दसैनिक बलों से सेवानिवृत होकर यहां बसे थे। सेवानिवृति का लाखों रुपया यहां घर बनाने में खर्च कर चुके हैं लेकिन अब घर धंसने के बाद बेघर होकर सरणालयों में हैं।
कई परिवारों के साथ दूध पीते बच्चे भी हैं जोशीमठ तहसील की उर्गम घाटी के ल्याणी गांव के एसएसबी से सेवानिवृत देवेन्द सिंह भी ऐसे ही बदनसीब अधिकारी हैं। इनका घर माउंट व्यू होटल के नीचे है। दो जनवरी की रात को इनके घरों में दरार और भूधसाव की चपेट मे आ गया था और अब पिछली तीन जनवरी से नगरपालिका के गेस्ट हाउस में रह रहे हैं। देवेन्द सिंह की पत्नी बताती है कि पूरी जिंदगी की कमाई यहा लगायी और आज एकाएक ऐसा हो गया, यह कल्पना से भी परे है। इन्हीं के घर के बगल में उगर्म के भर्की गांव के गजेन्द्र सिंह के मकान की भी ऐसी ही स्थिति है। देवेन्द्र सिंह के परिवार के साथ ही इ्रन्हें भी तीन जनवरी को घर से रेस्क्यू कर नगरपालिका में एक कमरा दिया गया है। गजेन्द सिंह बताते हैं कि राहत के नाम पर जिला प्रशासन ने चार हजार रुपये देकर खानापूर्ति पूरी कर दी है। हम सब लोग अपने भविष्य को लेकर आशंकित है। क्षतिग्रस्त घर में हमारा सामान जहां तहां पड़ा है। घर की इस हालत को देखकर वहां जाने की इंच्छा भी नहीं होती है। जयप्रकाश कालोनी के ठीक उपर सिंगधार वार्ड में दो जनवरी की रात को एकाएक मकान के चकनाचूर हो जाने से अभी भी भयभीत 30 साल के देवेन्द्र सिंह बताते हैं रात के एक बजे अचानक ऐसा लगा कि धरती फट रही है। घर में मेरे अलावा मेरी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे थे।समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है। सबकुछ छोड़कर बदहवास हालत में भाई के घर गए। पहली रात उसके घर में कांटी फिर जिला प्रशासन ने हमारे घर को खतरनाक घोषित किया और हमें जोशीमठ शहर में गुरूद्वारे में बने शरणालय में रखा है। देवेन्द्र की पत्नी राहत शिविर में रूहांसी होकर कहती है। खेती और पशुपालन से आजीविका चलती है। दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। बारी-बारी से घर जाते हैं अपने मवेशियों को घास पानी देने। आगे क्या होगा यहीं चिंता अब सता रही है।
जोशीमठ के आपदा पीड़ित मौसम को लेकर भी चिन्तित है। अभी सर्दी का मौसम शुरू हुआ है। बर्फबारी जोशीमठ और आसपास के इलाके में होती रहती है। यदि ठीक से व्यवस्था नहीं हुई तो कड़ाके की सर्दी में आपदा पीड़ितों की दिक्कते और भी बढ़ने वाली है।

